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Transformer

 👉 ट्रांसफार्मर की बनावट l

 👉 कार्य सिद्धांत l

 👉 ठंडा करने की विधियाँ ।

 👉 ट्रांसफार्मर के बारे में जानकारी उपयोग l

 👉 लॉस और लॉस ज्ञात करने की विधियां । ऐफीसैंसी आदि ।

 👉 ट्रांसफार्मर की बनावट l

 👉    मुख्य भाग , ब्रीयर , कन्सरवेटर व  रक्षात्मक साधन , 

 👉 ट्रांसफार्मर की किस्में 

 ट्रांसफार्म की पैरेलल विधियाँ , स्कॉट कनैक्शन ।

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प्रश्न -ट्रांसफार्मर किसे कहते हैं और वोल्टेज के अनुसार कितने प्रकार के होते हैं  ?

 उत्तर - ट्रांसफार्मर ( Transformer ) वह स्थिर उपकरण है जो कि आल्टरनेटिग विद्युत ऊर्जा को कम वोल्टेज से अधिक वोल्टेज या अधिक वोल्टेज से कम वोल्टेज में दी गई फ्रीकुएंसी ( Frequency ) पर काम करता है जब वोल्टेज कम व ज्यादा की जाती है तो फ्रीकुएंसी में कोई परिवर्तन नहीं होता है उसे ट्रांसफार्मर कहते हैं ।

 प्रश्न -ट्रांसफार्मर किसे कहते हैं और वोल्टेज के अनुसार कितने प्रकार के होते हैं ?

 उत्तर - ट्रांसफार्मर ( Transformer ) वह स्थिर उपकरण है जो कि आल्टरनेटिग विद्युत ऊर्जा को कम वोल्टेज से अधिक वोल्टेज या अधिक वोल्टेज से कम वोल्टेज में दी गई फ्रीकुएंसी ( Frequency ) पर काम करता है जब वोल्टेज कम व ज्यादा की जाती है तो फ्रीकुएंसी में कोई परिवर्तन नहीं होता है उसे ट्रांसफार्मर कहते हैं ।

Question:- ट्रांसफार्मर की बनावट और उसके कार्य सिद्धांत ( Working Principle ) का वर्णन करो ?

 उत्तर - ट्रांसफार्मर की बनावट ( Construction ) : -ट्रांसफार्मर के मुख्य दो भाग होते हैं । 

( 1 ) कोर ( Core ) 

( 2 ) वाइंडिंग ( Winding )

Core कोर : -यह सिलिकोन लैमीनेशन की बनाई जाती है जिससे एडी करन्ट व हिस्टेरिसिस लॉस कम । प्रत्येक लैमीनेशन वारनिंस के द्वारा दोनों तरफ से इन्सुलेट किया जाता है । लैमीनेशन की मोटाई 0.35 mm से 0.5 mm तक होती है कोर का काम मैगनेटिक फ्लक्स ( Magnetic Flux ) को आसान रास्ता प्रदान करना है । कोर के जिस भाग पर वाइंडिंग की जाती है उसे लिम्ब ( Limb ) कहते हैं । वा

( Winding ) : -कोर पर वाइंडिंग की जाती है इसके लिए इनैमल्ड ( Enamelled ) वायर प्रयोग की जाती है । जो वाइंडिंग सप्लाई के साथ जोड़ी जाती है उसे प्राइमरी वाइंडिंग तथा जिस पर लोड जोड़ा जाता है या सप्लाई ली जाती है उसे सैकेडरी वाइंडिंग कहते हैं ।

 बनावट के आधार पर यह दो प्रकार की होती है ।

( क ) सिलिन्ड्रीकल टाइप ( Cylinderical Type ) : - वह वाइंडिंग जिसकी लम्बाई लिम्ब ( Limb ) की लम्बाई के समान होती है उसे सिलिन्ड्रीकल वाइंडिंग कहते हैं ।

 ( ख ) सैन्डविच टाइप ( Sandwitch Type ) : - इसमें वाइंडिंग को एक के बाद एक सैन्डविच की तरह वाइंड करते हैं । इस प्रकार की वाइंडिंग शैल टाइप ट्रांसफार्मर में ए.सी इस्तेमाल की जाती है ।


 कार्य सिद्धांत ( Working Principle ) : -यह ट्रांसफार्मर म्युचुअल इंडक्शन के सिद्धांत पर काम करता है । ट्रांसफार्मर में एक कोर ( core ) होता है जो नरम लोहे की चादरों का बना होता है ।   इन कोर के ऊपर दो अलग वाइंडिंग होती हैं ।   जैसा चित्र में दिखाया गया है ।   दोनों वाइंडिंग आपस में एक - दूसरे से इन्सुलेटेड होती हैं ।   जब एक वाइंडिंग को ए . सी . सप्लाई के साथ जोड़ा जाता है तो इसमें ए . सी . करंट के बहाव होने से चुम्बकीय क्षेत्र बनता है ।    जो कि दूसरी वाइंडिंग के साथ लिंक ( Link ) होता है क्योंकि दोनों वाइंडिंग आपस में ( Magnetically ) मिले हुए हैं और इस तरह दूसरी वाइंडिंग में पैदा होने वाली वोल्टेज  आल्टरनेटिंग होती है ।      यह पैदा हुई ई.एम.एफ. दूसरी वाइंडिंग में टर्न की संख्या पर निर्भर करती है 


प्रश्न - ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं ? ( Types of Transformers ) उत्तर- ( क ) कोर की बनावट के अनुसार ट्रांसफार्मर तीन प्रकार के होते हैं 

: 1.कोर टाइप ट्रांसफार्मर ( Core Type Transformer )

 2.शेल टाइप ट्रांसफार्मर ( Shell Type Transformer )

 3.बैरी टाइप ट्रांसफार्मर ( Berry Type Transformer )

 कोर टाइप ट्रांसफार्मर : -इसमें ( एल ) प्रकार की कोर इस्तेमाल की जाती है जिससे कोर आयताकार आकार में आ जाती है । यह कोर सिलिकोन स्टील धातु की बनाई जाती है । इसकी चार लिम्ब ( Limbs ) होती हैं । प्रत्येक Limbs का क्षेत्रफल एक - दूसरे के बराबर होता है । प्राईमरी और सैकेण्डरी वाइंडिंग किन्ही दो विपरीत Limb के ऊपर की जाती है । चुम्बकीय रेखाओं के लिये एक ही रास्ता होता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । इस प्रकार का ट्रांसफर कम पावर ( Out Put ) के लिये बनाया जाता है ।




शैल टाइप ट्रांसफार्मर : -यह ट्रांसफार्मर भी पलली - पतली पत्तियों के मिलने से बनता है । इसकी तीन Limbs होती है तथा बीच वाली लिम्ब का एरिया बाहरी लिम्ब से दुगना होता है । प्राइमरी और सैकडरी वाइंडिंग बीच वाली लिम्ब ( Limb ) के ऊपर बारी - बारी से दाइंड की जाती है । इस प्रकार के ट्रांसफार्मर में E और | आकार की पत्तियाँ प्रयोग में लाई जाती हैं तथा चुम्बकीय रेखाओं के लिये दो मार्ग होते हैं । जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । इस प्रकार का ट्रांसफार्मर कम वोल्टेज व अधिक पावर ( Out Put ) के लिये बनाया जाता है




 बैरी टाइप ट्रांसफार्मर : -इस प्रकार के ट्रांसफार्मर को वितरित कोर ( Distributed Core ) टाइप गुण ट्रांसफार्मर भी कहते है । यह ट्रांसफार्मर छोटा होता है लेकिन दूसरे दोनों प्रकार के ट्रांसफार्मर के पाये जाते हैं । चुम्बकीय कोर ( Core ) आयताकार के रूप में होती है और क्वाइलों के चारों और लपेटी जाती है । लार को कम करने के लिये बाहर क्वाइलों की अपेक्षा कोर की बीच वाली लिम्ब का क्रास - सैक्शन कुछ कम बनाया जाता है तथा इसमें कई चुम्बकीय रास्ते बन जाते हैं इसलिये इसे बैरी टाइप ट्रांसफार्मर कहते हैं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है । इस प्रकार के ट्रांसफार्मर कम प्रयोग में लाये जाते हैं ।



Fig .

 विभिन्न प्रकार के ट्रांसफार्मर के लिए कोर निम्नलिखित आकार की बनाई जाती है । 233 ' E ' और T TYPE ' L ' TYPE ' U TYPE * 4 . FIVE LIMB

 प्रश्न - ट्रांसफार्मर के क्या लाभ हैं ?

 उत्तर - ट्रांसफार्मर के निम्नलिखित लाभ हैं:

 1.ह स्थिर यन्त्र होने के कारण इसमें कोई आवाज नहीं होती है ।

2.इसकी ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती इसलिये इसको लगाने से बिजली सस्ती पड़ती है ।

3.ट्रांसफार्मर को बहुत अधिक वोल्टेज पर बनाने के लिए इन्सुलेशन करना आसान होता है ।

4. इसकी लाइफ ज्यादा होती है । 

5.किसी भी जगह इसको लगा सकते हैं ।

 6.ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन को सस्ता कर देता है जिससे एल्यूमीनियम या कॉपर ( Copper ) की बचत हो जाती है ।

 प्रश्न - ट्रांसफार्मेशन अनुपात से क्या समझते हो , स्पष्ट करो ? 

उत्तर - ट्रांसफार्मेशन अनुपात ( Transformation Ratio ) : -ट्रांसफार्मर के प्राइमरी और सैकेन्डरी वाइंडिंग में टों ( Turns ) के अनुपात को उसकी ट्रांसफार्मेशन अनुपात कहते हैं । वोल्टेज का अनुपात उस अनुपात के बराबर ही होगा लेकिन करंट का अनुपात वोल्टेज के अनुपात से उल्टा होगा ।

 Es/ Ep =Ns/Np = Ip/Is माना इस अनुपात को ट्रांसफार्मेशन अनुपात कहते हैं । 

Ep = प्राइमरी वोल्टेज Es = सैकेन्डरी वोल्टेज NP = प्राइमरी वाइंडिंग में टर्नस Ns = सैकेन्डरी वाइंडिंग में टर्नस Is = सैकेन्डरी की करंट Ip = प्राइमरी की करंट 


वोल्टेज के अनुसार ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते हैं :

1 स्टेप अप ट्रांसफार्मर ( Step up Transformer ) : -

वह ट्रांसफार्मर जो कम वोल्टेज को अधिक वोल्टेज में बदल देती है उसे स्टैप अप ट्रांसफार्मर कहते हैं जैसे 440/11000 वोल्ट -

2 ) स्टैप डाउन ट्रांसफार्मर ( Step down Transformer ) : -

 ट्रांसफार्मर जो अधिक वोल्टेज को कम वोल्टेज में बदल देता है उसे स्टैप डाउन ट्रांसफार्मर कहते हैं । जैसे -440 / 220 वोल्ट । 

 फेज ( Phase ) के अनुसार ट्रांसफार्मर तीन प्रकार के होते हैं :

 ( 1 ) सिंगल फेज़ ( Single Phase ) : इसमें दो वाइंडिंग होती हैं एक प्राइमरी और दूसरी सेकेन्द्रों वाइंडिंग । ( 2 ) पोली फेज़ ( Poly Phase ) : -इसके अन्तर्गत निम्नलिखित प्रकार के ट्रांसफार्मर आते हैं : ( 1 ) टू फेज़ ट्रांसफार्मर ( Two Phase Transformer ) 

( 2 ) श्री फेज़ ट्रांसफार्मर ( Three Phase Transformer ) 

( 3 ) छ : फेज़ ट्रांसफार्मर ( Six Phase Transformer ) अधिकतर सिंगल फेज़ व थ्री फेज़ ट्रांसफार्मर ही इस्तेमाल किये जाते है । 

प्रश्न - ट्रांसफार्मर की कोर किस धातु की और कौन से आकार में बनाई जाती है ? चित्र द्वारा दिखाओं

 उत्तर - ट्रांसफार्मर की कोर ऐसी धातु की बनाई जाती है जिसमें एडी करंट और हिस्टेरिसस लॉस कम हो जैसे सीलिकन स्टील की पतली - पतली पत्तियां ( Laminations ) प्रत्येक पत्ती को दोनों तरफ से वार्निश के द्वारा इन्सुलेटेड कर दिया जाता है । इन पत्तियों की मोटाई 0.35 मि . मी . 0.5 मि . मी . तक होती है ।

जब प्राइमरी वाइंडिंग को ए . सी . सप्लाई के साथ जोड़ते हैं तो उसके अन्दर आल्टरनेटिंग करंट पैशा होती जिससे उसमें बदलने वाला फलक्स ( आल्टरनेटिंग फलक्स ) बनता है । इस फलक्स के कारण प्राइमरी वाइंडिंग है यह वोल्टेज सैल्फ इन्डक्सन की वजह से पैदा होती है जोकि लगभग दी गई वोल्टेज के बराबर होती है । ई . एम . एफ . पैदा हो जाती है । जिसे बैक ई . एम . एफ . कहते हैं । यह दी गई वोल्टेज का विरोध करती इस प्रकार प्राइमरी में Ep वोल्टेज पैदा होती है । प्राइमरी के टर्न Np के अनुसार इसलिये प्रत्येक टर्न में वोल्टेज बोल्ट अब यही फलक्स सैकेन्डरी में भी गुजरेगा जिसमें पैदा होने वाली वोल्टेज रेशों वही होगी अर्थात वोल्टेज प्रति टर्न में यह सैकेन्ड्री में पैदा हुई वोल्टेज म्युचुअल इन्डक्शन के द्वारा पैदा होगी इसकी दिशा      प्राइमरी की दिशा के समान होगी जिससे दी हुई वोल्टेज का विरोध करेगी । NsxEp 3TG : Es = Np ES Ns या इसको K अक्षर से प्रदर्शित किया जाता है । E Np यदि K का मान एक से अधिक हो तो स्ट्रेप - अप ट्रांसफार्मेशन होता है उसे स्टैप - अप ट्रांसफार्मर कहते हैं । यदि K का मान एक से कम हो . तो स्टैप डाउन ट्रांसफार्मेशन होता है उसे स्टैप डाउन ट्रांसफार्मर कहते  हैं 

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